चोरी के बाद बंसुला डीपा रुद्रा खेल मैदान के सामने तालाब पार स्थल के शिव मंदिर को मिली नई पूजन सामग्री

 चोरी के बाद बंसुला डीपा रुद्रा खेल मैदान के सामने तालाब पार स्थल के शिव मंदिर को मिली नई पूजन सामग्री


बसना(रूपानंद साव) :- बंसुला डीपा के दर्राखांचा तालाब किनारे स्थित शिव मंदिर में हाल ही में तांबे का चारू पात्र, तांबे का सर्प सहित अन्य धातु की पूजन सामग्री चोरी होने की घटना के बाद मंदिर की धार्मिक व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में चिंता बनी हुई थी।


 इसी बीच जनप्रतिनिधि एवं ग्राम पंचायत बंसुला के नवनिर्वाचित पंच दुलामणि सिदार की सक्रिय पहल से मंदिर को पुनः पूजन सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में सहयोग मिला।


पूर्व  बसना भाजपा मंडल अनु. जन जाति प्रकोष्ठ के मंडल अध्यक्ष मान.दुलामणी सिदार जी की पहल पर शिव मंदिर समिति बंसुला के सक्रिय अध्यक्ष एवं दानदाता श्री उपेंद्र साव जी(मनीष होटल के संचालक )द्वारा खुले मन से मंदिर के लिए तांबे का चारू पात्र एवं भगवान भोलेनाथ का तांबे का सर्प भेंट किया। दानदाता द्वारा धार्मिक आस्था से की गई इस पहल की ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं ने सराहना की।


बंसुला निवासी शिव मंदिर समिति के अध्यक्ष एवं दानदाता उपेंद्र साव ने तांबे का चारू पात्र व सर्प किया भेंट, दुलामणी सिदार की पहल से हुआ सहयोग





उल्लेखनीय है कि इस शिव मंदिर के निर्माण एवं प्राण-प्रतिष्ठा की पहल पवन कुमार पटेल, पिता स्व. लीलाबर पटेल ने की थी। मंदिर निर्माण में उन्होंने तन-मन-धन से महत्वपूर्ण सहभागिता निभाई, जबकि ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर की धार्मिक गतिविधियां निरंतर संचालित होती आ रही हैं।


बंसुला डीपा के ग्रामीणों ने कहा कि चोरी की घटना से उत्पन्न कमी के बीच दानदाता ह्रदय युवा सम्राट एवं शिव मंदिर समिति के अतिसक्रिय अध्यक्ष श्री उपेंद्र साव जी द्वारा पूजन सामग्री उपलब्ध कराना सराहनीय सामाजिक एवं धार्मिक सहयोग है। वहीं श्रीमान दुलामणी सिदार  जी की पहल और मंदिर निर्माण के सूत्रधार श्री पवन कुमार पटेल जी एवं पुरे परिवार की भूमिका को भी ग्रामीणों ने मंदिर के प्रति समर्पण का उदाहरण बताया।



नोट: मंदिर स्थल की पहचान के लिए स्थानीय बोलचाल में   आई टी आई प्रशिक्षण केंद्र बंसुला के आगे  स्थित तालाब रुद्रा स्पोर्टर्स क्लब प्लेग्राउंड के सामने प्रचलित ‘दर्राखांचा तालाब’ नाम का उल्लेख किया गया है; तालाब का आधिकारिक नामकरण सर्वसम्मती से गणमान्य नागरिको द्वारा आज तक नहीं किया जाना या वर्तमान में जलाशय का नाम स्पष्ट नहीं है।

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