सस्ता भाड़ा, बड़ा जोखिम! बसना में यात्री ऑटो बन रहे मालवाहक, छोटे हाथी और पिकअप संचालकों की रोजी-रोटी पर संकट
बसना(रूपानंद साव):- नगर एवं अंचल में माल ढुलाई के कारोबार को लेकर एक ऐसी स्थिति सामने आ रही है, जिसमें कम भाड़े का आकर्षण जहां आम लोगों को तत्काल आर्थिक राहत दे रहा है, वहीं दूसरी ओर वैध व्यावसायिक मालवाहक वाहनों के मालिकों और चालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहराता दिखाई दे रहा है।
क्षमता से अधिक सामान, लंबे लोहे के पाइप और सीमेंट-खाद की बोरियों की ढुलाई से सुरक्षा पर सवाल; चौक-चौराहों पर यातायात व्यवस्था और नियमों के पालन की जरूरत
आरोप है कि तीन पहिया यात्री ऑटो का इस्तेमाल सवारी परिवहन के बजाय मालवाहक वाहन के रूप में किया जा रहा है। कम किराये के कारण कई ग्राहक छोटे हाथी, टाटा सुपर एस और महिंद्रा पिकअप जैसे मालवाहक वाहनों की जगह यात्री ऑटो बुक करना पसंद कर रहे हैं।
इससे मालवाहक वाहन संचालकों की बुकिंग प्रभावित होने और उनके सामने आर्थिक चुनौतियां बढ़ने की बात कही जा रही है।
कम भाड़े के सामने मालवाहक कारोबार की चुनौती
बसना जैसे छोटे कस्बे में सुबह से शाम तक लगभग 50 से 55 छोटे हाथी एवं अन्य छोटे मालवाहक वाहन व्यावसायिक कार्यों में सक्रिय रहने का अनुमान बताया जा रहा है।
इन वाहनों के मालिकों ने वाहन खरीदने के लिए कर्ज और किस्तों का सहारा लिया है। नियमित बुकिंग मिलने पर ही वे वाहन की किस्त, डीजल, मरम्मत, टायर, बीमा, फिटनेस तथा अन्य जरूरी खर्चों का भुगतान कर पाते हैं
लेकिन जब समान दूरी के लिए यात्री ऑटो से 100 से 200 से 300 रुपये तक कम भाड़े में सामान पहुंचाने का विकल्प मिलता है, तो ग्राहक स्वाभाविक रूप से कम खर्च वाले साधन की ओर आकर्षित होते हैं।
इसका सीधा असर मालवाहक वाहन संचालकों की बुकिंग पर पड़ सकता है।
स्थिति यह है कि वाहन की किस्त चुकाना, रखरखाव कराना, दस्तावेजों को अद्यतन रखना और परिवार का भरण-पोषण करना कई संचालकों के लिए कठिन होता जा रहा है।
उनके सामने सवाल है कि जब निर्धारित व्यावसायिक उपयोग के लिए वाहन खरीदकर नियमों के अनुसार कारोबार करने की कोशिश की जाती है, तब नियमों से अलग तरीके से संचालित वाहनों के साथ प्रतिस्पर्धा में कारोबार कैसे बचाया जाए
यात्री ऑटो में माल ढुलाई, सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती
तीन पहिया यात्री ऑटो मूलतः यात्रियों के परिवहन के लिए बनाए जाते हैं।
उनका उपयोग किस प्रकार के सामान की ढुलाई के लिए किया जा सकता है, यह संबंधित वाहन के पंजीकरण, परमिट, स्वीकृत उपयोग और लागू नियमों पर निर्भर करता है।
ऐसे में यात्री ऑटो को नियमित रूप से मालवाहक वाहन की तरह इस्तेमाल करने की वैधता की जांच आवश्यक है।
स्थानीय स्तर पर यह शिकायत भी सामने आती रही है कि कुछ यात्री ऑटो में उनकी बनावट और निर्धारित क्षमता के अनुरूप न होने वाला भारी सामान लाद दिया जाता है।
खाद और सीमेंट की 16-16 बोरियों तक ढोने, लंबे लोहे के एंगल, पाइप तथा अन्य निर्माण सामग्री को वाहन से बाहर तक निकालकर ले जाने के मामले चिंता बढ़ाते हैं।
लगभग पांच फीट वाले यात्री ऑटो में 20 फीट तक लंबी सामग्री लादकर भीड़भाड़ वाले मार्गों से गुजरना अन्य वाहन चालकों, पैदल यात्रियों और खुद ऑटो चालक के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
लंबा सामान मोड़ पर दूसरे वाहनों से टकरा सकता है, सड़क पर संतुलन बिगाड़ सकता है और अचानक ब्रेक लगाने की स्थिति में दुर्घटना का कारण बन सकता है।
अधिक वजन होने पर तीन पहिया वाहन का संतुलन बिगड़ने, गड्ढे में पहिया पड़ने पर एक ओर झुकने अथवा पलटने का खतरा भी बढ़ सकता है।
बसना में इस प्रकार की घटनाएं पहले हो चुकी होने का दावा किया जा रहा है। इन घटनाओं की आधिकारिक पुष्टि और विवरण सामने आना भी जरूरी है, ताकि जोखिम का वास्तविक आकलन किया जा सके।
सवाल केवल सस्ते भाड़े का नहीं, बल्कि सड़क पर चल रहे वाहन की सुरक्षा, उसकी निर्धारित क्षमता और उससे जुड़े लोगों की जान का है।
चौक चौराहे पर यातायात नियंत्रण को लेकर सवाल
बसना नगर के चौक चौराहे, कई करासिंग डीवाडर वाले गौरव पथ और आसपास के व्यस्त सिंगल सड़क मार्गों पर यातायात प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
स्थानीय शिकायतों के अनुसार, भीड़भाड़ वाले स्थानों पर लंबे पाइप, लोहे के एंगल और क्षमता से अधिक सामान लदे वाहन गुजरते दिखाई देते हैं। ऐसे में यदि पर्याप्त यातायात नियंत्रण, नियमित जांच और नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं किया जाता, तो दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
व्यस्त चौराहों पर यातायात पुलिस की नियमित मौजूदगी, संदिग्ध वाहनों की जांच और सड़क पर असुरक्षित तरीके से ले जाए जा रहे सामान पर कार्रवाई की मांग उठना स्वाभाविक है.हालांकि, संबंधित समय और स्थान पर यातायात पुलिस की तैनाती की वास्तविक स्थिति तथा नियमों के उल्लंघन के मामलों की पुष्टि प्रशासन से की जानी चाहिए।
इसी तरह बिना वैध बीमा, फिटनेस प्रमाणपत्र अथवा आवश्यक परमिट के वाहन चलने की शिकायतों की भी जांच जरूरी है।
केवल आरोप के आधार पर किसी वाहन को दोषी मानने के बजाय परिवहन विभाग को दस्तावेजों की जांच कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
मालवाहक वाहन मालिकों की पीड़ा: खर्च पूरा करें या परिवार चलाएं?
छोटे हाथी, टाटा सुपर एस और महिंद्रा पिकअप जैसे मालवाहक वाहन केवल परिवहन के साधन नहीं, बल्कि अनेक परिवारों की आजीविका का आधार हैं।
कोई चालक स्वयं वाहन चलाकर परिवार का खर्च उठाता है, तो कोई वाहन खरीदने के लिए बैंक या वित्तीय संस्थान की किस्त भरता है
वाहन खड़ा रहने पर भी किस्त, बीमा और अन्य निर्धारित खर्च समाप्त नहीं होते। वहीं वाहन चलने पर डीजल, मरम्मत, टायर तथा रखरखाव का खर्च लगातार बना रहता है। यदि पर्याप्त बुकिंग नहीं मिलती, तो आमदनी और खर्च के बीच संतुलन बिगड़ जाता है।ऐसे में कम भाड़े पर माल ढुलाई का विकल्प ग्राहकों को राहत देता है, लेकिन इसका पूरा आर्थिक प्रभाव उन संचालकों पर पड़ता है जिन्होंने माल ढुलाई के लिए व्यावसायिक वाहन में निवेश किया है। समस्या का समाधान किसी एक वर्ग को दोषी ठहराने में नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने में है कि सभी वाहन संचालक लागू नियमों के दायरे में रहकर काम करें और सुरक्षा से समझौता न हो।
भाड़े की प्रतिस्पर्धा से तनाव की स्थिति
मालवाहक वाहन चालकों और यात्री ऑटो चालकों के बीच किराये को लेकर समय-समय पर तनाव की स्थिति बनने की बात भी सामने आती है। एक ओर ग्राहक कम खर्च में सामान घर तक पहुंचाना चाहते हैं, तो दूसरी ओर मालवाहक वाहन संचालकों का कहना है कि निर्धारित क्षमता, वाहन के प्रकार और व्यावसायिक खर्चों को ध्यान में रखे बिना भाड़े की तुलना करना उनके लिए नुकसानदेह साबित होता है।
यदि इस प्रतिस्पर्धा का आधार केवल कम कीमत रह जाता है और वाहन के सुरक्षित उपयोग तथा वैधानिक दस्तावेजों की अनदेखी होती है, तो इसका नुकसान अंततः सड़क सुरक्षा और व्यवस्थित परिवहन व्यवस्था को उठाना पड़ सकता है।
ग्राहकों को भी यह समझने की जरूरत है कि सामान की कीमत के साथ उसकी सुरक्षित ढुलाई भी महत्वपूर्ण है। रास्ते में सामान टूटने, गिरने अथवा दुर्घटना होने पर शुरुआती बचत से कहीं अधिक नुकसान हो सकता है। इसलिए सामान के आकार, वजन और दूरी के अनुसार उचित वाहन का चयन आवश्यक है।

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